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कामवासना की भावना हर पवित्र रिश्ता ख़ाक बना देती है | जानिए इससे कैसे बचा जाए ››

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काम वासना की भावना एक साइलेंट किल्लर है, जोकि न केवल एक इंसान को बर्बाद करती है बल्कि पूरे कुल उजाड़ देती है। अधिक जानिए » सतगुरु जी की प्यारी साध-संगत जीओ, हर मजहब के पवित्र ग्रंथ और संत-पीर-फकीरों के अनमोल वचनों के अनुसार जो भी व्यक्ति आज के इस घोर कलयुग में मन के चंगुल से निकलकर, भगवान-अल्लहा-वाहेगुरु-गॉड के नाम की चर्चा करते हैं व साथ-ही-साथ में अपने अस्त-व्यस्त जीवन में से कुछ समय निकालकर मानवता भलाई के कार्य करते हैं, तो उस समय में ऐसे लोगो का दर्जा देवता और देवियों से भी कई गुणा ज्यादा बढ जाया करता है और ऐसे जीव अति भाग्यशाली हो जाया करते हैं. हमारे कहने का मतलब यह है कि, आप अपने निजी जीवन में जैसे भी हैं या जैसे भी कार्य करते हैं, हमे उनसे कोई मतलब नहीं है, लेकिन अगर इस समय आप इस लेख या भाषण को पढ़ रहे हैं तो आप हमारे लिए देवी और देवताओं के समान हैं और इसलिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं और PapaTheGreat.Net पर आने के लिए तहदिल से स्वागत करते हैं जी. आज आपकी सेवा में जिस भजन पर सत्संग स्वरुप ये आर्टिकल लिखा गया है, वो भजन है: संत डॉ. गुरमीत राम ...

सुमिरन टॉनिक - करे मन के दिए जख्मों का शर्तिया इलाज | बढ़ाए आत्मिक शक्ति और बनाए आत्मनिर्भर इंसान | जानिए कैसे:

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जब इन्सान किसी के सहारे हो जाता है तो यकीनन एक दिन दुःख-परेशानियाँ उसे घेरती हैं. इसलिए परमानेंट हमदर्द सिर्फ ईश्वर को बनाइये। Lines & Image by: PapaTheGreat.Net कोई भी इन्सान अगर इश्वर का नाम लेता है तो उसका आत्मबल बड़ता चला जाता है, और आत्मबल जिनके अंदर होता है वो लोग हारी हुई बाजी भी जीत जाया करते हैं. आत्मबल हांसिल करने के लिए लोग जंगलो, पहाड़ो और उजाड़ों में न जाने कितने साल घूमते रहते हैं और भगवान की तलाश करते रहते हैं लेकिन असलियत में हमारे सभी धर्मो का सार (निचोड़) यही है कि चाहे घर-गृहस्थी में रहो या चाहे त्यागी-तपस्वी बनकर रहो, अगर राम का नाम जपोगे सिर्फ तभी ये जालिम मन काबू में आ सकता है वरना ये काबू में नहीं आता. गुरु जी फरमाते हैं कि पिछले कई सत्संगो में लोगों ने हमसे यह प्रश्न पूछा कि मन और आत्मा की आवाज़ में क्या अंतर है ? आखिरकार कैसे इस बात की पहचान करें कि कौन से विचार मन के हैं और कौन से विचार आत्मा के हैं. इसी बात को स्पष्ट करते हुए 31 मई 2017 की रूहानी मजलिस के दौरान गुरु जी ने बताया कि: हमारे पवित्र धर्मों में ये माना गया है ...