संदेश

दाढ़ी या झाड़ी लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वाह भाई बेला ना वक्त देखा ना कुवेला, विस्तारपूर्वक पढ़िए गुरु के प्यार की कशिश और रूहानियत के जवाब »

चित्र
मालिक की प्यारी साध-संगत जियो, मालिक से प्यार-मोहब्बत प्रेम लगाना बड़ा आसान है लेकिन आखिर तक औढ़ निभाना बड़ा ही मुश्किल होता है। बहुत सारी मुसीबतें आती हैं, लेकिन सबसे बड़ी तो मुसीबत सभी के अंदर बैठी है, और वो है आपका मन।  ये मन सिर्फ दो अक्षर का एक नाम है, देखने मे तो इसमे सिर्फ दो ही शब्द हैं 'म' और 'न' जिसका पूरा अर्थ है "मैं नहीं मानूँगा"। रूहानियत मे मन का मतलब है कि अगर कभी गुरु=पीर=फकीर=अल्लहा=वाहेगुरु=गॉड=रब की कोई भी बात आएगी तो ये मन कहता है कि "मैं नहीं मानूँगा" और अगर कोई काल की बात आती है तो कहता है कि "सिर्फ मैं ही हूँ और कोई नहीं है"।  तो ये मन बड़ी ही जबर्दस्त शक्ति है, आखिर तक औढ़ निभाना अच्छे संस्कारो का, पक्का विश्वास, सेवा और सुमिरन का ही काम है। मन पर काबू पाना बहुत ही मुश्किल है लेकिन जहाँ मालिक का नाम लेकर कोई काम किया जाए वहाँ कुछ असंभव नहीं होता। तो आइये मन से जुड़ी एक बात आपको सुनाते हैं जोकि डेरा सच्चा सौदा, सिरसा में गुरु जी ने सत्संग के दौरान सुनाई थी। ― भाग 1 ● प्रशन दुनियादारी का और जवाब रूहानियत का...